वेदों में लिखा है बरमूडा ट्राएंगल का असली कारण
#यह तो हम सभी जानते हैं कि अटलांटिक महासागर के पश्चिमी हिस्से में स्थित बरमूडा ट्राएंगल कितना रहस्यमयी है। इस से कई एयरक्राफ्ट और जहाज यहां से गायब हो चुके हैं लेकिन इसका पता आज तक कोई नहीं लगा सका है । लेकिन अगर हम वेदों पर नजर डालें तो इस रहस्य से जुड़े सवाल का जबाब मिलता हैं जो बताते हैं कि आखिर कहां गायब होते हैं ये जहाज
#ऋग्वेद में लिखी बात :- लगभग 23000 सालों पहले लिखे गए ऋग्वेद के अस्य वामस्य में कहा गया है कि मंगल का जन्म धरती पर हुआ है। ऋग्वेद में लिखा है कि जब धरती ने मंगल को जन्म दिया, तब मंगल को उसकी मां से दूर कर दिया गया तब भूमि ने घायल होने के कारण अपना संतुलन खो दिया (और धरती अपनी धुरी पर घूमने लगी)। उस समय धरती को संभालने के लिए दैवीय वैद्य अश्विनी कुमार ने त्रिकोणीय आकार का लोहा उसके चोटहिल स्थान में लगा दिया और भूमि अपनी उसी अवस्था में रुक गई। यही कारण है कि पृथ्वी की धुरी एक विशेष कोण पर झुकी हुई है, धरती का यही स्थान बरमूडा ट्रायंगल है। सालों तक धरती में जमा होने के कारण त्रिकोणीय लोहा प्राकृतिक चुम्बक बन गया और इस तरह की घटनाएं होने लगीं।
# चुंबक की तरह खींचना :- बरमूडा ट्राएंगल के रहस्य को सुलझाने के कई दावे किए जा चुके हैं लेकिन अभी इसका पुख्ता प्रमाण कुछ भी नहीं मिला। अभी तक जितना सुनने में आया है कि बरमूडा ट्राएंगल के अंदर एक पिरामिड छुपा है, जो चुम्बक की तरह हर चीज़ को खींचता है। लगातार जहाजों के गायब होने के चलते तकरीबन 500 साल बाद इसे ‘डेंजर रीजन’ का नाम दिया गया। बताया तो यह भी जाता है कि साल 1492 में अमेरिका की यात्रा के दौरान कोलम्बस ने भी यहां पर कुछ चमकता हुआ देखा जिसके बाद उनका मैग्नेटिक कंपास खराब हो गया था।
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