वैज्ञानिक भी भरते हैं पानी ऐसे रहस्य के आगे
प्रकृति के आगे हम सब छोटे थे और छोटे ही रहेंगे । आज हम विज्ञान के ज़रिए कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन प्रकृति की हर एक चाल हमारी हर उपलब्धि से बड़ी होती है। वैज्ञानिक अपने कई शोध में प्रकृति का रहस्य पता करने की कोशिश में हैं और आज भी ये सिर्फ कोशिश ही है। पुरातत्व विभाग अकसर ऐसी खोज करता है उनका वैज्ञानिक भी जवाब ढूंढ़ते रह जाते हैं।
#लोहे का करोड़ों साल पुराना हथौड़ा :- सन् 1934 में जब ये हथौड़ा पुरातत्व विभाग को मिला तो ये एक चौंका देने वाली घटना थी, जिसका कारण इस हथौड़े के लोहे की शुद्धता थी. साथ ही इस हथौड़े में लगी लकड़ी कोयला बन चुकी थी । मतलब साफ़ था, ये हथौड़ा करोड़ों साल पुराना था। जबकि इंसानों ने ऐसे औज़ार बनाने सिर्फ 10 हजार साल पहले शुरू किए थे।
# प्राचीन रॉकेट :- 5000 ईसा पूर्व की इस पेंटिंग में आपको रॉकेट दिख रहा होगा। वैज्ञानिक आज भी सोच रहें हैं कि क्या उस वक़्त ऐसा कोई रॉकेट था और अगर नहीं तो उन्होंने ये उस वक़्त सोचा कैसे ?
#खिसकते पत्थर :- कैलिफोर्निया की डेथ वैली के खिसकते पत्थर आज भी वैज्ञानिकों के लिए असुलझी पहेली बनी हुई है । 1972 में इस रहस्य को खोलने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी, लेकिन वो पूरी तरह से नाकाम रहे। नाकामी का वो दौर आज भी ज़ारी है।
#पिरामिड की ताकत :- प्राचीन मेक्सिकन शहर की दीवार अभ्रक से बनी है। अभ्रक ब्राज़ील में मिलता है जो यहां ये हज़ारों मील दूर है। इसका इस्तेमाल ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है। तो क्या उस वक़्त के कारीगर इससे ऊर्जा का संचार कर रहे थे, ये अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।
#लोलाडॉफ़ प्लेट :- नेपाल में खुदाई के दौरान कुछ पुरानी प्लेट्स मिली थीं जिन पर एलियन की आकृति थी।
#सहारा रेगिस्तान में बना पत्थरों का ढांचा :- 1973 में पुरातत्व विभाग ने सहारा के रेगिस्तान में पत्थरों का एक ढांचा खोज निकाला था, जो करीब 6000 साल पुराना था. अध्ययन से पता चला की इस ढांचे का इस्तेमाल उस वक़्त खगौलिय शास्त्र के लिए किया जाता था. लेकिन 6000 साल पहले इसका इस्तेमाल किस प्रकार होता था ये आज भी रहस्य बना हुआ है.
No comments